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Wednesday, 4 February 2015


शर्मनाक बेहद शर्मनाक... ये हिंदुस्तान का दुर्भाग्य है...

जो हवाएं जन आंदोलनों के रूप में देश की दिशा और दशा बदलने के लिए चली थीं... वो देश को एक 'घिनौनी राजनीति' की तरफ बहा कर ले गईं... 
फिर चाहे वो देश की आज़ादी का आन्दोलन हो, या
क्रांत्कारियों की पार्टी का आन्दोलन...
देश के जननायक जय प्रकाश नारायण का जेपी आन्दोलन हो... या
लोहिया का समाजवाद... या फिर
कांशीराम का दलित उत्थान...
वामपंथी विचार आन्दोलन हो... मजदूरों के हक़ की लड़ाई...
या अन्ना हजारे का जन लोकपाल आन्दोलन...
इतिहास गवाह है कि इन सारे आंदोलनों ने देश को सिर्फ भ्रष्ट राजनेता और राजनीतिक दलों को जन्म दिया है...
आज़ादी के आन्दोलन ने कांग्रेस पार्टी को जन्म दिया... संघ (आरएसएस) से जनसंघ निकला.. जनसंघ से जनता पार्टी और जनता पार्टी से भारतीय जनता पार्टी...
लोहिया के समाजवाद से मुलायम निकले... और धर्म, जातिवाद और तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली समाजवादी पार्टी... कांशीराम का दलित उत्थान मायावती और बहुजन समाज पार्टी तक सिमट कर रह गया...
जेपी आन्दोलन से... लालू प्रसाद, पासवान और शरद यादव जैसे लोग निकले... आन्दोलन की धारा ही बदल गई...
किसी के हक़ की लड़ाई नक्सलवाद में बदल गई...
अन्ना की भूख़ से केजरीवाल, किरण बेदी, जरनल वीके सिंह और कुमार विश्वास जैसे लोग पैदा हो गए... इण्डिया अगेंस्ट करप्शन आम आदमी पार्टी में गुम हो गया...
ये देश का दुर्भाग्य ही है और बेहद शर्मनाक भी...
अन्ना फिर से काले धन के मुद्दे पर आन्दोलन की बात कर रहे हैं...
न अन्ना ना अब कोई आन्दोलन न करना... इस देश को आप के बूढ़े और कमजोर नेतृत्व की कोई ज़रूरत नहीं... इसे अपने हाल पर छोड़ दें... हमें काले धन की कोई ज़रूरत नहीं है धन्यवाद...

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