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Saturday, 7 February 2015

महिला...अच्छी या बुरी...?... फैसला पुरुष को करना है...


शायद सही कहते हैं... कि जो पुरुष किसी महिला के प्रभाव से प्रभावित हो गया समझो वो बर्बाद हो गया... उसका पद, प्रतिष्ठा, मान, मर्यादा, ज्ञान, धन, बुद्दि, बल, विवेक, सुख.. सबका नाश हो गया.
एक ऐसी ही महिला ने... दिल्ली में पुरुषों के एक हँसते-खेलते परिवार पर ग्रहण लगा दिया और उनकी हंसी काफूर कर दी... 
अमित शाह और मोदी... उसकी ठंडी पड़ चुकी 'किरणों' में तेज समझ बैठे... जिसके प्रभाव से वो ऐसा झुलसे कि अपने सर्वश्व का नाश कर दिया...
और मत भ्रम ऐसी हुई कि... बेदी को राजनीति के एक नवजात (केजरी) के सामने जिसमें अभी नव तेज है..नव ओझ है... नव प्राण है...नव सांस है... जंग-ए-चुनाव के मैदान में उतार दिया...
महिला ज़्यादातर गलत और बुरी नहीं होती... अच्छी महिला अच्छी और बुरी महिला बुरी होती है... अच्छी-बुरी का फैसला पुरुष को अपने विवेक से करना है... महिला के प्रभाव से पुरुष को कितना प्रभावित होना है ये उसको तय करना है...
राजनीति में ऐसी कई मिसाले हैं.. जिसमें पुरुषों ने अपनी साख का नाश कर दिया... फिर वो चाहे...
कल्याण सिंह और कुसुम राय हों... जिसमें कल्याण का खुद का अस्तित्व धूमिल हो गया और उनकी पहचान कुसुम राय में समाहित हो गई... या
कांशीराम और मायावती हों...
मनमोहन और सोनिया हों... या
शशि थरूर और सुनन्दा... या फिर...
ऐसे कई सांसद, विधायक और मंत्री... ये सब महिलाओं के प्रभाव से प्रभावित हुए हैं...
इन सब की साख का नाश हुआ है...
( ये पोस्ट महिला विरोधी बिल्कुल भी नहीं है... मैं महिलाओं का सम्मान करता हूँ).. बस अच्छी और बुरी महिला में फ़र्क करना पुरुष को सीखना होगा..

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